The inspiration- Maa | Pooja Paath/ Vidhi | Festivals | Pilgrimages/Holy Places | Blog | Image Gallery | Contact Us
click to see the FaceBook page of 3marg

Navratri- Nav Durga Puja

Jai Maa!

Navratri is a famous festival celebrated in India and many other parts of the world amongst Hindus. Navratri or Nav Ratri means 9 nights dedicated for 9 devine forms of Maa, Adishakti Maa Durga. Navratras come 4 times a year according to the Hindu Calender however celebrated once or twice an year only in different parts of the world including by Hindus and few Sikhs. Among Bengali's it is celebrated before Dussehra once an year. The Navratras are The 9 names of Maa Durga are:

  1. Maa Shailputri
  2. Maa Brahmacharini
  3. Maa Chandraghanta
  4. Maa Kushmanda
  5. Maa Katyayani
  6. Maa Kalratri
  7. Maa Siddhidatri
  8. Maa Skandmata
  9. Maa Mahagauri


Maa Nav Durga


1. Maa Shailaputri

Day 1 belongs to Mata Shailputri

Vande Vaadidra Chhatalaabhaaya Chandrardh Kritshekhraam
Vrisharudhaam Shooldharaam Shaiputri Yashsvineem.
Durga Pooja ke pratham din Mata Shailputri ki pooja-vandana is mantra dwara ki jati hai.
Maa Durga ki pahli swaroopa aur Shailraaj Himalaya ki putri Shailputri ke pooja ke sath hi Durga Pooja aarambh ho jata hai. Navratra poojan ke pratham din kalash sthapna ke sath inki hi pooja aur aradhna ki jati hai. Mata Shailputri ka vahan Vrishabh hai, unke dahine hath me Trishul aur bayen hath me Kamal ka pushp hai. Navratra ke is pratham din ki upasna me Yogi apne man ko ‘Mooladhar’ chakra me sthit karte hain aur yahi se unki yog sadhna prarambh hota hai. Pauranik kathanusar Maa Shailputri apne purv janm me Prajapati Daksh ke ghar kanya roop me utpann huyi thi. Us samay mata ka naam Sati tha aur inka vivaah Bhagvan Shankar se hua tha. Ek bar Prajapati Daksh ne yagya aarambh kiya aur sabhi devtaao ko aamantrit kiya parantu Bhagvan Shiv ko aamantran na
hi diya. Apne maa aur bahno se milne ko aatur Maa Sati bina nimantran ke hi jab pita ke ghar pahunchi to unhe waha apne aur Bholenath ke prati tiraskar se bhara bhav mila. Maa Sati is apmaan ko sahan nahi kar saki aur wahi yogaagni dwara khud ko jalakar bhasm kar diya aur agle janm me Shailraj Himalaya ke ghar putri roop me janm liya. Shailraaj Himalaya ke ghar janm lene ke karan Maa Durga ke is pratham swaroop ko Shailputri kaha jata hai.


वंदे वाद्द्रिछतलाभाय चंद्रार्धकृतशेखराम |
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्री यशस्विनीम्‌ ||

दुर्गा पूजा के प्रथम दिन माता शैलपुत्री की पूजा-वंदना इस मंत्र द्वारा की जाती है.
मां दुर्गा की पहली स्वरूपा और शैलराज हिमालय की पुत्री शैलपुत्री के पूजा के साथ ही दुर्गा पूजा आरम्भ हो जाता है. नवरात्र पूजन के प्रथम दिन कलश स्थापना के साथ इनकी ही पूजा और उपासना की जाती है. माता शैलपुत्री का वाहन वृषभ है, उनके दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का पुष्प रहता है. नवरात्र के इस प्रथम दिन की उपासना में योगी अपने मन को 'मूलाधार' चक्र में स्थित करते हैं और यहीं से उनकी योग साधना प्रारंभ होता है. पौराणिक कथानुसार मां शैलपुत्री अपने पूर्व जन्म में प्रजापति दक्ष के घर कन्या रूप में उत्पन्न हुई थी. उस समय माता का नाम सती था और इनका विवाह भगवान् शंकर से हुआ था. एक बार प्रजापति दक्ष ने यज्ञ आरम्भ किया और सभी देवताओं को आमंत्रित किया परन्तु भगवान शिव को आमंत्रण नहीं दिया. अपने मां और बहनों से मिलने को आतुर मां सती बिना निमंत्रण के ही जब पिता के घर पहुंची तो उन्हें वहां अपने और भोलेनाथ के प्रति तिरस्कार से भरा भाव मिला. मां सती इस अपमान को सहन नहीं कर सकी और वहीं योगाग्नि द्वारा खुद को जलाकर भस्म कर दिया और अगले जन्म में शैलराज हिमालय के घर पुत्री रूप में जन्म लिया. शैलराज हिमालय के घर जन्म लेने के कारण मां दुर्गा के इस प्रथम स्वरुप को शैल पुत्री कहा जाता है.


2. Maa Brahmacharini

The second day belongs to Maa Brahmacharini. She is the second manifestation of Maa Durga who is worshippied on the second day of Navratri. In her name the word “Brahm” refers to “Tapa”. So Brahmcharini means Tapa Charini – The one who perform Tapa or penance. It is Said that the “Vedas”, “Tatva” & “Tapa” are synonyms of word “Brahm”. The form of Brahmacharini is tremendously effulgent and extremely majestic.

Jai Maa Brahmacharini...
Navratre Ke Dusre Din Maa Brahmacharini Ki Puja Ki Jati Hai,
'Brahm' Ka Arth Hai 'Tapa' Arthath Maa Ne Shiv Ji Ko Pati Rup Main Varan Karne Ko Ghor Tapa Kia Tha,
Maa Ke Ek Hath Me Kamandalu Hai Or Dusre Me Rudrash Mala.,
Maa Brahmcharini Ki Puja Karne Manushya Ko Abishat Bhudhi Prapat Hoti Hai.

माँ ब्रह्मचारिणी अपने सीधे हाथ में गुलाब का फूल पकड़े हुए हैं और अपने बाहिने हाथ में कमलदानु पकड़े हुए है. वह प्यार और वफ़ादारी को प्रदर्शित करती हैं. मा ब्रह्मचारिणी ज्ञान का भंडार है. रुद्राक्ष उनका बहुत सुंदर गहना हैं. माँ ब्रह्मचारिणी सक्षम है अनंत लाभ पहुँचाने मे . मा ब्रह्मचारिणी की आराधना करने से मनुष्य को प्राप्त होती हैं विजय और विजय हर जगह

 

 

 

 

 

 

 


3. Maa Chandraghanta

Pindaj Pravaraarudha Chandkopastra Kairyutaa
Prasaadam Tanute Mahyam Chandram Ghanshteti Vishruta.
Navratra ke tisre din Mata Chandraghanta ki pooja-vandna is mantra dwara ki jatia hi
Maa Durga ki 9 shaktiyo ki tisri swaroopa Bhagvati Chandraghanta ki pooja Navratra ke tisre din ki jati hai. Mata ke mathe par ghante aakar ka ardhchandra hai, jis karan inhe Chandraghanta kaha jata hai. Inka roop param shantidayak aur kalyankari hai. Mata ka sharir swarn ke saman ujjaval hai. Inka vahan Singh hai aur inked as hath hain jo ki vibhinn prakar ke astra-shastra se sushobhit rahte hain. Singh par savar Maa Chandraghanta ka roop yuddha ke liye uddhat dikhata hai aur unke ghante ki prachand dhvani se asur aur rakshas bhaybhit karte hain. Bhagvati Chandraghanta ki upasana karne se upasak aadhyatmik aur aatmik shakti prapt karta hai aur jo shraddhalu is din shraddha evam bhakti purvak Durga Saptsati ka path karta hai, wah sansar me yash, kirti evam samman ko prapt karta hai. Mata Chandraghanta ki pooja-archana bhakto ko sabhi janmo ke kashto aur paapo se mukt kar islok aur parlok me kalian pradan karti hai aur Bhagvati apne dono hatho se sadhko ko chirayu, such sampda aur rogo se mukt hone ka vardan deti hai. Manushya ko nirantar Mata Chandraghanta ke pavitra vigrah ko dhyam me rakhte huye sadhna ki or agrasar hone ka prayas karna chahiye aur is din mahilaon ko ghar me bulakar aadar samman purvak unhe bhojan karana chahiye aur kalash ya mandir ki ghanti unhe bhent swaroop pradan karna chahiye. Isase bhakt par sada Bhagvati ki kripa drishti bani rahti hai.

पिण्डज प्रवरारुढ़ा चण्डकोपास्त्र कैर्युता |
प्रसादं तनुते मह्यं चंद्र घंष्टेति विश्रुता ||
नवरात्र के तीसरे दिन माता चंद्रघंटा की पूजा-वंदना इस मंत्र के द्वारा की जाती है-
मां दुर्गा की 9 शक्तियों की तीसरी स्वरूपा भगवती चंद्रघंटा की पूजा नवरात्र के तीसरे दिन की जाती है. माता के माथे पर घंटे आकार का अर्धचन्द्र है, जिस कारण इन्हें चन्द्रघंटा कहा जाता है. इनका रूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है. माता का शरीर स्वर्ण के समान उज्जवल है. इनका वाहन सिंह है और इनके दस हाथ हैं जो की विभिन्न प्रकार के अस्त्र-शस्त्र से सुशोभित रहते हैं. सिंह पर सवार मां चंद्रघंटा का रूप युद्ध के लिए उद्धत दिखता है और उनके घंटे की प्रचंड ध्वनि से असुर और राक्षस भयभीत करते हैं. भगवती चंद्रघंटा की उपासना करने से उपासक आध्यात्मिक और आत्मिक शक्ति प्राप्त करता है और जो श्रद्धालु इस दिन श्रद्धा एवं भक्ति पूर्वक दुर्गा सप्तसती का पाठ करता है, वह संसार में यश, कीर्ति एवं सम्मान को प्राप्त करता है. माता चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना भक्तो को सभी जन्मों के कष्टों और पापों से मुक्त कर इसलोक और परलोक में कल्याण प्रदान करती है और भगवती अपने दोनों हाथो से साधकों को चिरायु, सुख सम्पदा और रोगों से मुक्त होने का वरदान देती हैं. मनुष्य को निरंतर माता चंद्रघंटा के पवित्र विग्रह को ध्यान में रखते हुए साधना की ओर अग्रसर होने का प्रयास करना चाहिए और इस दिन महिलाओं को घर पर बुलाकर आदर सम्मान पूर्वक उन्हें भोजन कराना चाहिए और कलश या मंदिर की घंटी उन्हें भेंट स्वरुप प्रदान करना चाहिए. इससे भक्त पर सदा भगवती की कृपा दृष्टि बनी रहती है.

 

 

 


4. Maa Kushmanda

Maa Kushmanda is the name of the fourth Durga. This Shakti or celestial energy bestows the basic necessities and everyday sustenance on the world and creates the Universe merely by laughing. Residing in solar systems, She shines brightly in all ten directions very much like the Sun beaming with a radiant aura.

Equipped with eight hands, Ma Kushmanda holds seven types of brilliant weapons, gleaming in her seven hands and a rosary in her right. Seeming resplendent mounted on a Lion, Kumbh Bhand means seeing the cosmic dance in the form of Pindi; the knowledge of cosmic intricacies in humans. She likes the offerings of Kumhde, leading to her name Kushmanda. Her abode is Bhima Parvat.
भगवती माँ दुर्गा जी के चौथे स्वरुप का नाम कूष्मांडा है ! अपनी मंद हल्की हसीं द्वारा अंड अर्थात ब्रह्माण्ड को उत्पन्न करने के कारण इन्हें कुष्मांडा देवी के नाम से अभिहित किया गया है ! जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था , चारों ओर अन्धकार ही अंधकार व्याप्त था, तब माँ कुष्मांडा ने ही अपनी हास्य से ब्रह्माण्ड कि रचना की थी ! अतः यही सृष्टि की आदि - स्वरूपा आदि शक्ति है ! इनके पूर्व ब्रह्माण्ड का अस्तित्व था ही नहीं ! इनका निवास सूर्य मंडल के भीतर के लोक में है ! सूर्य लोक में निवास सूर्य मंडल के भीतर के लोक में है ! सूर्य लोक में निवास कर सकने की क्षमता और शक्ति केवल इन्ही में है ! इनके शरीर की कान्ति और प्रभा भी सूर्य के समान ही दीप्तिमान और भास्कर है ! इनके तेज की तुलना इन्ही से की जा सकती है ! अन्य कोई भी देवी - देवता इनके तेज और प्रभाव की समता नहीं कर सकते ! इन्ही के तेज और प्रकाश से दसों दिशाएं प्रकाशित हो रही है ! ब्रह्माण्ड की सभी वस्तुओं और प्राणियों में अवस्थित तेज इन्ही की छाया है ! इनकी आठ भुजाएं है ! अतः ये अष
्ट भुजी देवी के नाम से भी विख्यात है ! इनके सात हाथो में क्रमशः कमण्डलु , धनुष - बाण , कमल पुष्प , अमृत पूर्ण कलश , चक्र , तथा गदा है ! आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जपमाला है ! इनका वाहन सिंह है ! इस कारण से भी कुष्मांडा कही जाती है ! नवरात्री - पूजन के चौथे दिन कुष्मांडा देवी के स्वरुप की ही पूजा उपासना की जाती है ! इस दिन साधक का मन अनाहत चक्र में अवस्थित होता है ! अतः इस दिन उसे अत्यंत पवित्र और अचल मन से कुष्मांडा देवी के स्वरुप को ध्यान में रख कर पूजा उपासना के कार्य में लगना चाहिए ! माँ कुष्मांडा की उपासना से भक्तों के समस्त रोग - शोक विनष्ट हो जाते है ! इनकी भक्ति से आयु , यश , बल , और आरोग्य की वृद्धि होती है ! माँ कुष्मांडा अत्यल्प सेवा और भक्ति से भी प्रसन्न होने वाली है ! यदि मनुष्य सच्चे ह्रदय से इनका शरणागत बन जाये तो फिर उसे अत्यंत सुगमता से परम पद की प्राप्ति हो सकती है ! हमे चाहिए की हम वेद पुराणों में वर्णित विधि - विधान पूर्वक माँ दुर्गा की पूजा - उपासना और भक्ति के मार्ग पर अग्रसर हो ! माँ के भक्ति मार्ग पर कुछ ही कदम आगे बढ़ने पर भक्त साधक को उनकी कृपा का सुक्ष्म अनुभव होने लगता है ! यह दुःख स्वरुप संसार उसके लिए अत्यंत सुखद और सुगम बन जाता है ! माँ की उपासना मनुष्य को सहज भाव से भवसागर से पार उतारने के लिए सर्वाधिक सुगम व् श्रेयस्कर मार्ग है ! माता की उपासना मनुष्य को आँधियों - व्याधियों से सर्वथा विमुक्त करके उसे सुख - समृद्धि और उन्नति की ओर ले जाने वाली है ! माँ कुष्मांडा देवी के श्री चरणों में सत सत नमन !

 

 


5. Maa Skandamata

Navratre ke 5ve din maa skandamata ki puja ki jati hai,
skandamata ke char bhujae hai,or tin netra...avam unki godh mein kumar kartikeye baithe hai jinko skand bhi kaha jata hai,
kumar kartikeye mahadev or mata parvati ke putr hai,
is kaaran maa ko maheswari bhi kaha jata hai.

माँ दुर्गा का पंचम रूप स्कन्दमाता के रूप में जाना जाता है. भगवान स्कन्द कुमार ( कार्तिकेय )की माता होने के कारण दुर्गा जी के इस पांचवे स्वरूप को स्कंद माता नाम प्राप्त हुआ है. भगवान स्कन्द जी बालरूप में माता की गोद में बैठे होते हैं इस दिन साधक का मन विशुध्द चक्र में अवस्थित होता है. स्कन्द मातृस्वरूपिणी देवी की चार भुजायें हैं, ये दाहिनी ऊपरी भुजा में भगवान स्कन्द को गोद में पकडे हैं और दाहिनी निचली भुजा जो ऊपर को उठी है, उसमें कमल पकडा हुआ है। माँ का वर्ण पूर्णतः शुभ्र है और कमल के पुष्प पर विराजित रहती हैं। इसी से इन्हें पद्मासना की देवी और विद्यावाहिनी दुर्गा देवी भी कहा जाता है। इनका वाहन भी सिंह है|
माँ स्कंदमाता सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी हैं| इनकी उपासना करने से साधक अलौकिक तेज की प्राप्ति करता है | यह अलौकिक प्रभामंडल प्रतिक्षण उसके योगक्षेम का निर्वहन करता है| एकाग्रभाव से मन को पवित्र करके माँ की स्तुति करने से दुःखों से मुक्ति पाकर मोक्ष का मार्ग सुलभ ह
ोता है|
स्कन्दमाता की मंत्र :
सिंहासना गता नित्यं पद्माश्रि तकरद्वया |
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी ||
या देवी सर्वभू‍तेषु माँ स्कंदमाता रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

 

 

 


6. Maa Katyayani

Jai Maa Katyayani...
Navratre Ke 6the Din Maa Katyayani Ki Puja Ki Jati Hai,
Maa Katyayani Ka Rang Swarn Ke Saman Hai,
Maa Ke Char Hath Va Tin Netra Hai,
Maa Ke Sawari Sher Hai,
Aisi Manyata Hai Ki Gopio Ne Shri Krishan Ko Pati Rup Main Pane Ke Lie Maa Katyayani Ki Puja Ki Thi,
Atha Jiske Vivah Me Bilambh Ho Rha Ho Ya Jo Manchaha Var Pana Chahta Ho Vo Bhakti Bhav Se Maa Ke Puja Jarur Kare,
Maa Subka Kalyan Karengi.

चंद्र हासोज्ज वलकरा शार्दू लवर वाहना |
कात्यायनी शुभं दद्या देवी दानव घातिनि ||
नवरात्र के छठे दिन इस मंत्र से माता कात्यायनी की पूजा वंदना करना चाहिए.
नवरात्री के छठे दिन आदिशक्ति मां दुर्गा की षष्ठम रूप और असुरों तथा दुष्टों का नाश करनेवाली भगवती कात्यायनी की पूजा की जाती है. मार्कण्डये पुराण के अनुसार जब राक्षसराज महिषासुर का अत्याचार बढ़ गया, तब देवताओं के कार्य को सिद्ध करने के लिए देवी मां ने महर्षि कात्यान के तपस्या से प्रसन्न होकर उनके घर पुत्री रूप में जन्म लिया. चूँकि महर्षि कात्यान ने सर्वप्रथम अपने पुत्री रुपी चतुर्भुजी देवी का पूजन किया, जिस कारण माता का नाम कात्यायिनी पड़ा. मान्यता है कि यदि कोई श्रद्धा भाव से नवरात्री के छठे दिन माता कात्यायनी की पूजा आराधना करता है तो उसे आज्ञा चक्र की प्राप्ति होती है. वह भूलोक में रहते हुए भी अलौकिक तेज़ से युक्त होता है और उसके सारे रोग, शोक, संताप, भय हमेशा के लिए विनष्ट हो जाते हैं. मान्यता है कि भगवान श्री कृष्ण को पति रूप में प्राप्त करने के लिए रुक्मिणी ने इनकी ही आराधना की थी, जिस कारण मां कात्यायनी को मन की शक्ति कहा गया है.

 

 

 

 

 

 

 


 

7. Maa Kalratri

Maa Kalratri or Mata Kaalratri is the seventh manifestation of Maa Durga.

Kalaratri means the One who is “the Death of Kaal”. Here Kaal is dedicated as time & death. Kalaratri is the one who destroys ignorance and removes darkness. This form primarily depicts that life also has dark side – the violent Mother Nature and creates havoc and removes all dirt. She is also known as Shubhankari.In this form Goddess Kalratri killed Raktabeej. Raktabeej was a demon who could multiply from every drop of his blood which fell on the ground. The Goddess Kaalratri killed him by licking the blood before it could reach the ground and hence conquered him. She endows her devotees with calm and courage.

The complexion of Maa Kalaratri is like dark night with bountiful hair and has four hands. The left two hands holds a cleaver and a torch, and the right two are in the mudras of “giving” and “protecting”. She has necklace is so shining like thunder. She has three eyes which emanate rays like lightning. Flames appear through her nostrils when she inhales or exhales air. Her mount is donkey. Blue,Red, White color should be used to wear on this day.

मां दुर्गा के सातवें स्वरूप या शक्ति को कालरात्रि कहा जाता है, दुर्गा-पूजा के सातवें दिन माँ काल रात्रि की उपासना का विधान है. मां कालरात्रि का स्वरूप देखने में अत्यंत भयानक है, इनका वर्ण अंधकार की भाँति काला है, केश बिखरे हुए हैं, कंठ में विद्युत की चमक वाली माला है, माँ कालरात्रि के तीन नेत्र ब्रह्माण्ड की तरह विशाल व गोल हैं, जिनमें से बिजली की भाँति किरणें निकलती रहती हैं, इनकी नासिका से श्वास तथा निःश्वास से अग्नि की भयंकर ज्वालायें निकलती रहती हैं. माँ का यह भय उत्पन्न करने वाला स्वरूप केवल पापियों का नाश करने के लिए.
माँ कालरात्रि अपने भक्तों को सदैव शुभ फल प्रदान करने वाली होती हैं इस कारण इन्हें शुभंकरी भी कहा जाता है. दुर्गा पूजा के सप्तम दिन साधक का मन ‘सहस्रार’ चक्र में अवस्थित होता है.
कालरात्रिमर्हारात्रिर्मोहरात्रिश्र्च दारूणा. त्वं श्रीस्त्वमीश्र्वरी त्वं ह्रीस्त्वं बुद्धिर्बोधलक्षणा..
मधु कैटभ नामक महापराक्रमी असुर से जीवन की रक्षा हेतु भगवान विष्णु को निंद्रा से जगाने के लिए ब्रह्मा जी ने इसी मंत्र से
मां की स्तुति की थी. यह देवी काल रात्रि ही महामाया हैं और भगवान विष्णु की योगनिद्रा हैं. इन्होंने ही सृष्टि को एक दूसरे से जोड़ रखा है.
देवी काल-रात्रि का वर्ण काजल के समान काले रंग का है जो अमावस की रात्रि से भी अधिक काला है. मां कालरात्रि के तीन बड़े बड़े उभरे हुए नेत्र हैं जिनसे मां अपने भक्तों पर अनुकम्पा की दृष्टि रखती हैं. देवी की चार भुजाएं हैं दायीं ओर की उपरी भुजा से महामाया भक्तों को वरदान दे रही हैं और नीचे की भुजा से अभय का आशीर्वाद प्रदान कर रही हैं.
बायीं भुजा में क्रमश: तलवार और खड्ग धारण किया है. देवी कालरात्रि के बाल खुले हुए हैं और हवाओं में लहरा रहे हैं. देवी काल रात्रि गर्दभ पर सवार हैं. मां का वर्ण काला होने पर भी कांतिमय और अद्भुत दिखाई देता है. देवी कालरात्रि का यह विचित्र रूप भक्तों के लिए अत्यंत शुभ है अत: देवी को शुभंकरी भी कहा गया है.


8. Maa Mahagauri

Jai Maha Gauri, the eighth manifestation of Maa Durga.
Gaur Varn Va Gaur Abhushan Or Gaur Vastr Hone Ke Karan Inka Nam Mahagauri padha,
Mahaguari Parvati Devi Ka Dusra Nam Hai,
Maa Ne Shivji Ko Pane Ke Lie Ghor Tap Kia Jiske Karan Unke Sharir Ka Rang Kala Pad Gaya Tha,
Shiv G Ne Unki Tapasya Se Prasan Hokar Unko Patni Rup Me Swikar Kia Va Gaur Rang Bhi Pradan Kia..
Astmi Ke Din Kanya Pujan Ka Bhi Vidan Hai,
Visheskar 8varsh ki kanya Ka Pujan Jarur Krna Chaie..
Maa Ap Subpar Kripa Kare..

श्वेते वृषे समारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः |
महागौरी शुभं दद्यान्त्र महादेव प्रमोददा ||
दुर्गा पूजा के अष्टमी तिथि को माता महागौरी की पूजा इस मंत्र से करना चाहिए.
भक्तों के सारे पापों को जला देनेवाली और आदिशक्ति मां दुर्गा की 9 शक्तियों की आठवीं स्वरूपा महागौरी की पूजा नवरात्र के अष्टमी तिथि को किया जाता है. पौराणिक कथानुसार मां महागौरी ने अपने पूर्व जन्म में भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी, जिसके कारण इनके शरीर का रंग एकदम काला पड़ गया था. तब मां की भक्ति से प्रसन्न होकर स्वयं शिवजी ने इनके शरीर को गंगाजी के पवित्र जल से धोया, जिससे इनका वर्ण विद्युत-प्रभा की तरह कान्तिमान और गौर वर्ण का हो गया और उसी कारणवश माता का नाम महागौरी पड़ा. माता महागौरी की आयु आठ वर्ष मानी गई है. इनकी चार भुजाएं हैं, जिनमें एक हाथ में त्रिशूल है, दूसरे हाथ से अभय मुद्रा में हैं, तीसरे हाथ में डमरू सुशोभित है और चौथा हाथ वर मुद्रा में है. इनका वाहन वृष है. नवरात्र की अष्टमी तिथि को मां महागौरी की पूजा का बड़ा महात्म्य है. मान्यता है कि भक्ति और श्रद्धा पूर्वक माता की पूजा करने से भक्त के घर में सुख-शांति बनी रहती है और उसके यहां माता अन्नपूर्णा स्वरुप होती है. इस दिन माता की पूजा में कन्या पूजन और उनके सम्मान का विधान है.

 

 


9. Maa Siddhidatri

Maa Siddhidatri is the ninth form of Goddess Durga who is worshipped on the ninth or final day of the Navratras. ‘Siddhi’ means perfection in Sanskrit. Looking pleased, Goddess Siddhidatri holds a chakra in her right lower hand and a mace in the upper right. In the left lower hand, She has a conch and in her upper left hand, a lotus flower. She is usually shown ensconced in a lotus flower with the lion as her mount.

The Goddess Siddhidatri is capable of bestowing various occult powers. According to the Markandaye Purana, Anima, Mahima, Garima, Laghima, Prapti, Prakaamya, Ishitva and Vashitva are the eight siddhis or supernatural accomplishments. Whereas Anima, Mahima, Garima, Ladhima, Prapti, Prakaamya, Ishitva,Vashitva, Sarvakaamaal, Saadhita, Sarvagynatva, DurShravana, Parkaayapraveshan, VakaSiddhi, Kalpavrushatva, Shrishti, Samharkaransaamarthya, Amaratva, Sarvanyayakatva, Bhavana and Siddhi are the eighteen supernatural skills as per the Brahmavaivarta Purana.

सिद्ध गन्धर्व यज्ञद्यैर सुरैर मरैरपि |
सेव्यमाना सदा भूयात्‌ सिद्धिदा सिद्धि दायिनी ||
नवरात्र के अंतिम दिन माता सिद्धिदात्री की आराधना इस मंत्र से करना चाहिए
नवरात्र के अंतिम दिन देवी दुर्गा की नवीं शक्ति और भक्तों को सब प्रकार की सिद्धियां प्रदान करनेवाली मां सिद्धिदात्री की पूजा का विधान है. मार्कंडेय पुराण के अनुसार माता अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व ये आठ प्रकार की सिद्धियां प्रदान करनेवाली हैं, जिस कारण इनका नाम सिद्धदात्री पड़ा. अपने लौकिक रूप में मां सिद्धिदात्री चार भुजाओं वाली हैं. इनका वाहन सिंह है. ये कमल के पुष्प पर आसीन हैं. आस्थावान भक्तों की मान्यता है कि इस दिन शास्त्रीय विधि-विधान और पूर्ण निष्ठा के साथ माता की उपासना करने से उपासक को सभी प्रकार की सिद्धियां प्राप्त होती है. देवी पुराण के अनुसार भगवान शिव ने इनकी कृपा से ही इन सिद्धियों को प्राप्त किया था और इनकी अनुकम्पा से ही भगवान शिव का आधा शरीर देवी का हुआ था, जिस कारण भोलेनाथ अर्द्धनारीश्वर नाम से विख्यात हुए.

Meanwhile you can see our Maa Bhagwati's Image Gallery

 

 

Blog:

Vishal sharma,malkapur: Apne katyayni ji ki photo repete kar di hai, plz ,. Prifix dat bug

Admin: Thanks Vishal Ji, it is done. Jai Maa

Google Advertisement





Feel free to post your comments and additions. We will screen and upload.

Name and Place:

What is 2+1=

 

All Active Links


Temples/Online Yatras
Maa Bala Sundri Devi
Maa Jwala Ji
Maa Bhadrakali Kurukshetra
Maa Chintpurni Devi
Maa Naina Devi
Maa Mansa Devi
Maa Tripurmalini Devi
Swarg Ki Doosri Seedhi
Baba Murad Shah Ji
Shiv Bari Temple
Kaleshwar Mahadev Temple
Sada Shiva Temple
Amarnath Yatra
  -Dandwat Amarnath Yatra
  -Shrawan Kumar
  -Yatra by a Crippled
  -Artificial Legs
Salasar Balaji
Pushkar
Shiva Temples
51 Shaktipeeths Temples

Projects Running
Naudevi Yatra
Sati Sthan- Kanghal
Khatu Shyam
Maa Chamunda Devi
Maa Kangra Devi
Maa Shakumbhari Devi
Maa Chamunda Devi
Brahma Temple-Pushkar


Pooja Paath
Shri Ganesh Stotram
Sankat Nashan Ganesh Stotram
Maa Durga 108 Naam
Shani Chalisa
Shiv Chalisa
Rudrashtakam

Blogs/ Write Ups
How to be happy? -Nitin
Need Vs Greed- Nitin
Significance of No.108
Purpose of Human Life-Nitin
see all blog...




This is 3marg.info! With No Copyright Restrictions. A Free World! Inform And Get Informed! Disclaimer Policy
An Innitiative of PlaceOnTop.com
click to see the FaceBook page of 3marg