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Historical incidents related to Maa Jwalaji
(Mata Jwala Ji Temple- District Kangra, Himachal Pradesh)

[In Hindi]

|| Jai Maa Jwala Ji ||

History related to Sh. Dhyanu Bhakt and King Akbar

Listening to the rising name and fame of the auspicious and miraculous constantly running Jyotis, the famous Dhyanu Bhakt also came to this destination along with his thousand companions. The king of that time, i.e. Akbar was informed of the same and he summoned Dhyanu Bhakt in this court. The general accused him of raising his head in the regime of King and calling himself bigger than King Akbar. To this Dhyanu bhakt replied that he does not call himself bigger than the king, instead Maa Jwala as the biggest of all and She is the king of the whole world and universe where as King Akbar was just the king of India. Being presented infront of the king, he was asked to show a miracle to prove his true devoteeness towards his Maa. King akbar wanted to test the powers of Mata Jwalaji. Dhyanu called himself a very small Bhakt/ devotee of Mata Jwalaji and that he could not. The general suggested to cut off the head of the horse his was riding to Mata Jwala and if the powers of Mata Jwala were authentic, She would put the head back on. Dhyanu Bhakt called it as a sin the king had done and asked him still that he should keep the head and the torso of the horse intact for a month. The king agreed and allowed him to do the rest of his pilgrimage.

Dhyanu Bhagat proceeded further and upon reaching Mata Jwalaji Temple, pleaded for Her kripa. She, the almighty knew all and he begged Her to fix the head of his horse and make it alive again and also that he would then be able to answer King Akbar for the sinful act he did to test Her powers. He prayed and begged for many days and even after that when Maa did not to the same, the great bhakt, but his own head in front of Maa Jwala and offered it to Her.

She was Maa Aadi/ Maa Jagat Janaji and appeared immediately and put the head of Her divotee back on his torso and gave him life again. Coming back to life Dhyanu Bhakt, fell on Maa's feet and prayed that we humans do not know the proper procedures and rituals to worship Her and requested that in coming times She does not take this big test of Her devotees as every devotee cannot offer his head and that she accepts the prayers of the devotees in future with a simple offering of Nariyal(coconut) and a flag and grant their wishes. To this Maa agreed to accept the prayers with the same in future and would grant all wishes with true heart and got invisible there after.

Over there in Delhi, with the kripa of Maa Jwala, the head of the horse also got attached to the torse and got alive. To this the amazed Akbar still did not want to believe in the powers of Maa Jwala and sent his general again to Jwalaji to test her presence in this world. The general tried to extinguish the jyotis by putting various thick sheets of iron on top. However the powerful and miraculous jyotis of Maa Jwala came above tearing the iron sheets.

The foolish general was not ready to accept his defeat and went up the hill around 2 kilometers to get a river down the temple through a temporary path of stones. He then flooded the auspicious Jyotis with the running water. As and how the water started filling the area, the more powerful became the Jyotis(flames). When the temple was completely flooded with water, the jyotis started floating over the water. The general hard to accept and with grief, reported the same to Akbar who realized his mistake of testing Maa's powers. He realized that he should have never done such a deed of sin. He decided then to walk barefeet to Maa Jwalaji and offer a sava mann (one and a quarter quintal) Chhattar of Gold as an apology. Maa Jwala Devi refused to accept the same as the Gold Chhattar turned immediately dark to an unknown metal or alloy. Seeing this Akbar fell on his feet and begged for forgiveness for the sin of testing Maa Jwala. Maa is said to have forgiven Akbar. He later offered and prayed Maa with Paan, Supari, Dhwaja (flag), Nariyal(coconut) and Chunari (Stole) and he there after returned back to Delhi happily.

This chhattar has been kept in the temple compound towards the left side as a momento. Upon testing the same in the modern world, the Chhatar is an alloy comprised of various common and uncommon metals.

History related to Maharaja Ranjit Singh

It is a historical incident that once Maharaja Ranjit Singh's Senapath(General), Sardar Hari Singh Nalwa got imprisoned in a war at Kabul Kandhar. Then to relieve him, Maharaja Ranjit Singh prayed to Maa Jwala Ji. Upon fulfillment of his wishes, he got the Kalash and the Tomb of the temple coated with Gold. Later on, Maharaja Ranjit Singh's grandson, Kunwar Naunihal Singh ws a great follower of Maa Jwala and got the silver gates made for the temple.

Other Historical Incidents

In the 14th century, another Mughal ruler tried to destroy the Hindu Idols, at that time, with Maa's Prakop, there came thousands of honey bees and pushed the soldiers back. Even Aurangzeb, returned back to Delhi after knowing Maa Jwala Devi's powers.

Guru Goraknath Ji's history related to Maa Jwala at the page of Gorakhnath Dibbi.


 

 

अकबर और ध्यानु भक्त की कथा

यह बात उस समय की है जब भारत में मुग़ल सम्राट अकबर का शासन था । वहा  पर नदौन ग्राम में ध्यानु नामक एक माँ का भक्त रहता था । वह एक हजार यात्रियों सहित माता के दर्शन के लिये जा रहा था । इतना बड़ा दल देखकर बादशाह के सिपाहियों ने उन्हें चांदनी चौक में रोक लिया । और ध्यानु भक्त को दरबार में पेश किया गया । बादशाह ने पूछा - तुम इतने आदमीयो सहित कहा जा रहे थे । ध्यानु  ने हाथ जोड़कर कहा की मै ज्वालामाई के दर्शन को जा रहा हु ।और   बाकी सारे  लोग भी ज्वाला माई के दर्शन को जा रहे है । हम सभी माता के भक्त है ।


अकबर ने यह सुनकर पूछा की ये ज्वालामाई कौन है और जहा आप सभी जा रहे हो वहा  जाने से क्या होगा ?

ध्यानु भक्त ने कहा कि  महाराजा - ज्वालामाई पुरे संसार की देवी है । वह अपने भक्तो का बहुत ध्यान रखती है । और जो भी भक्त पुरे मन से माँ से कुछ भी मागता है उसकी मनोकामना जरुर पूरी होती है । माँ की शक्ति का चमत्कार ऐसा है कि  उनके स्थान पर बिना तेल- बत्ती के ही ज्योति जलती रहती है ।

यह बात सुनकर अकबर बोले -  तुम्हारी  ज्वाला माई इतनी ताकतवर है इस बात का यकीन हमें कैसे होगा । तुम माता के भक्त हो , अगर तुम कोई चमत्कार देखाओ तो हम माने की माँ में शक्ति है ।

ध्यानु ने नम्रता से कहा कि - श्री मान ! मै  तो माता का एक तुछ भक्त हु । मै  भला कोई चमत्कार कैसे कर सकता हु ।


अकबर ने कहा -

अगर तुम्हरी पूजा पवित्र है और तो माता तुम्हारी  पूजा से संतुष्ट है तो वह तुम्हारी लाज अवश्य बचाएगी । अगर माता तुम जैसे भक्तो का ध्यान नहीं देगी तो तुम्हारी इबादत का क्या फायदा ?

या तो तुम्हारी देवी माँ ही झूटी है । या तो तुम  खुद उनकी भक्ति के काबिल नहीं हो ।

इम्तिहान के लिये हम तुम्हारे घोड़े की गर्दन काट देते है , तुम अपनी देवी माँ से कहकर उस घोड़े को जिन्दा करा देना । और अकबर ने घोड़े की गर्दन  कटवा दी ।


ध्यानु भक्त ने कोई उपाय न देखकर अकबर से एक माह का समय माँगा और घोड़े के सर और बाकि शरीर को सुरक्षित रखने का अनुरोध किया | अकबर ने उसकी बात मान ली | बादशाह से विदा होकर ध्यानु अपने साथियो के साथ माता के मंदिर गया और स्नान पूजन आदि करने के बाद रात भर माता का जागरण किया | प्रातः काल आरती के समय ध्यानु ने माता से हाथ जोड़कर विनती की -


हे माँ ! आप सब जानती हो , बादशाह मेरी भक्ति की परीक्षा  ले रहा है मेरी लाज रखना माँ और घोड़े को जिन्दा कर देना | यदि आप ऐसा नहीं करेगी तो मैे अपना सर काटकर आपके चरणो में अर्पित कर दुँगा ,क्योकि लज्जित होकर जीने से अच्छा होगा मैे अपने प्राण त्याग दु | यह मेरी प्रतिज्ञा है आप उत्तर दे माँ |



कुछ समय तक उत्तर न पाकर ध्यानु ने अपनी तलवार से अपना शीश काटकर देवी माँ को भेट कर दिया |


उसी समय माँ ज्वाला देवी प्रकट हुई और ध्यानु को पुनः जीवित कर दिया | माँ ने ध्यानु से कहा की दिल्ली   में घोड़े का सर जुड़ गया है और घोडा जीवित हो उठा है, अतः अब लेट न करो और तुरंत दिल्ली  पहुँचो ,अब तुम्हे लज्जित नहीं होना पड़ेगा | इसके अलावा और कोई इच्छा हो , वर मागो |


ध्यानु ने माता को नमस्कार किया और निवेदन किया कि हे माँ ! आप अपने भक्तो की इतनी कठिन परीक्षा न लिया करे हर कोई अपनी गर्दन काट कर आपको भेट नहीं कर सकता है | अतः आपसे निवेदन कि किसी साधारण भेट से ही भक्तो की मनोकामना पुरी कर दिया करे |


तथास्तु ! अब मैे केवल नारियल की भेट और सच्चे मन से की गयी पूॅजा से ही प्रसन्न होकर मनोकामना पुरी कर दुगी |


उधर दिल्ली में जब घोडा जीवित हुआ तो सारे लोग सहित अकबर भी चकित हो गए | इसके बाद  बादशाह ने कुछ सिपाहियों को ज्वाला जी भेजा | सिपाहियों ने वापस आकर अकबर को सुचना दी की वहा जमीन से  रोशनी की लपट निकल रही है ,शायद उसी की ताकत से यह करिश्मा हुआ है , अगर आप हुकम करे तो इसे बंद कर दे ,इस तरह हिन्दू के इबादत की जगह खत्म हो जाएगी


अकबर ने स्वीकृति दे दी | शाही सिपाहियों ने पहले उस पवित्र ज्योति के ऊपर लोहे के मोटे मोटे तवे रख दिए | परन्तु दिव्य ज्योति तवे को फोड़ कर ऊपर निकल आई | इसके बाद ज्योति के ऊपर एक नहर का बहाव उस ओर मोड़ दिया गया जिससे ज्योति बुझ जाये , पर ऐसा नहीं हुआ | शाही सिपाही इस बात से बहुत परेशान हुए और उन्होंने इसकी सुचना अकबर को दी | अकबर भी ये जानकर बहुत हैरान हुआ , इसके बाद अकबर ने अपने विद्वान पंडितो ने विचार विमर्श किया | विद्वानो ने अकबर को स्वय वहा जाकर माँ का चमत्कार देखने को कहा | और नियमानुसार भेट आदि चढ़ाकर देवी को प्रसन्न करे | बादशाह के लिए दरबार में जाने का यह नियम है कि स्वय अपने कंधे पर सवा मन शुद्ध सोने का छत्र लादकर नंगे पैरो माता के दरबार जाय |

अकबर अपने छत्र के साथ माता के दरबार पंहुचा | वहा दिव्य ज्योति के दर्शन किये और जैसे ही अपना छत्र नीचे रखा ,वह टूट गया और कहा जाता है कि वह सोने का न रहा और न ही किसी और धातु का |


इसका अर्थ हुआ माता ने अकबर की भेट को अस्वीकार कर दिया , अकबर ने कई प्रकार से माता से विनती की पर वो सफल नहीं हुआ और दिल्ली  वापस आ गया और अपने सिपाहियों से भक्तो से अच्छे से पेश आने को कहा |

अकबर बादशाह द्वारा चढ़ाया गया खंडित छत्र माता के दरबार में बाई ओर आज भी पड़ा हुआ है जो देखा जा सकता है |


|| बोलो साँचे दरबार की जय ||


 

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Neelakshi singh Khangarot...- Jaipur (Raj.): Good Job Guyzz...
May Mahamaai bless u..
i want to know why devotte's cant cross Bias river with  Maa chintpurni's Halwa prasad..????
Plzz Reply me fast...
Jai mata di
Admin: thanks for the blessings from Maa. For the answer, I am afraid, I have not heard of the reason till now. There could be a story behind the same as well. Will try to get the reason in near future. If anyone else knows, kindly let us all know. Jai Maa!

banti singh begusarai bihar bharat: ye hamare dharam ki jawala hai jo sadiyo se aaj tak bujhi nahi. 'this is the great history of hindu &hindu dharam. our maaa realy protect all people like a child,,who belive&love maa

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